यह प्रतिमा तीर्थंकर के समवसरण में विराजमान होने की धोतक है, क्यूंकि समवसरण में विराजमान भगवान को दसों दिशाओं से देखा जाता है तो भी भगवान की मुखाकृति स्पष्ट दिखती है ।इस तरह की कलाकृति की प्रतिमाऐं अब नही बनती है।
सभी धर्मों के भगवान-महापुरुषों का जन्म एक दिन,पर महावीर स्वामी का...
॰ सभी त्यौहार एक दिन मनाते, पर जैन क्यों कई दिन में बांट देते
॰ धर्म की जगह धन और दर्शन की जगह बढ़ता प्रदर्शन
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