पहले धरा से, अब जल के भीतर निकली प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमा

0
582

29 मार्च 2025 /चैत्र कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
शुक्रवार 28 मार्च, को घड़ी जब सूरज के पश्चिम में उतरते 4 बजकर 33 मिनट दिखा रही थी, तब राजस्थान की मार्बल नगरी किशनगढ़ के प्राचीन शहर की गुंदोलाव झील पर भाजपा नेता किशनबंग वहां हिंदू नववर्ष की तैयारी देख रहे थे, वहां दीपक जलाने की शुरूआत करनी थी, तब प्राचीन झील की सीढ़ी पर पानी के बीच कुछ उठा दिखा, कौतुहलवश आगे बढ़े और देखा, कोई ठोस वस्तु है, लगभग 5 किलो की। वह मूर्ति सी लग रही थी, तभी वहां पंकज पहाड़िया जी भी पहुंच गये। 14 इंच ऊंची, 10 इंच चौड़ी उस प्रतिमा पर लगी काई को पानी से रगड़-रगड़ कर हटाया, तो वह ध्यानस्थ प्रतिमा श्याम ग्रेनाइट की दिखाई देने लगी, प्रतिमा खण्डित नहीं है। कोई कह रहा था बौद्ध की है, तो कोई कह रहा था जैन की।

जंगल की आग की तरह यह खबरे पूरे शहर में फैल गई। प्रतिमा को पंकज पहाड़िया जी के निवास पर रख दिया। इसकी जानकारी फिर श्री मुनिसुव्रत दि. जैन मंदिर के अध्यक्ष विनोद पाटनी जी ने चैनल महालक्ष्मी को दी और बताया कि प्रतिमा को मंदिर में नहीं लाये। क्यों? जवाब था कि उस पर ना कोई प्रशस्ति है ना चिह्न, इसलिये नहीं लाये।

चैनल महालक्ष्मी ने तत्काल सुझाव दिया कि यह दिगंबर जैन समाज की अनमोल धरोहर है। कोई चिह्न या प्रशस्ति का ना होना, इसकी एक हजार वर्ष प्राचीन होने का संकेत देता है। घर से पुलिस के मालखाने, पुरातत्व के म्यूजियम या प्रशासन के कब्जे की संभावना पैदा कर देता है। फिर यह दिगंबर प्रतिमा है, श्वेताम्बर भाई में से कोई अज्ञानतावश विवाद कर दे, तो और मुश्किल होगी। तब उन्होंने बताया कि श्वेताम्बर भाइयों ने पुष्टि कर दी है कि दिगंबर प्रतिमा है, पर चैनल महालक्ष्मी की बात पर जरूर ध्यान देंगे। हमने सुझाव दिया कि इसका वीडियो बना कर आचार्य वर्धमान सागरजी या आचार्य सुनील सागरजी से इसकी पहचान करवा लो। अध्यक्ष विनोद पाटनी जी ने बात मानी आर शनिवार सुबह मंदिर में स्थापित कर दी। जैन समाज के लिये हर्ष का विषय है।

इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3248 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन –
यह निर्विवाद सत्य है कि अधिकांश दिगम्बर प्रतिमायें ही धरा से मिलती हैं। उनको कोई विवादित करें, उससे पहले उसे जिनालय में अवश्य सुरक्षित कर, अभिषेक आदि शुरू कर दें। इसी राजस्थान के शाहपुरा के शिवपुरी में तीर्थंकर प्रतिमा को विवादित बना दिया और एक माह से पूजनीय प्रतिमा पुलिस के माल खाने में बंद पड़ी है। जागरूक रहिये।