जैनों को क्या मिलेगा? बहुत या ठेंगा!!! 4 सवालों के जवाब में पर्यटन मंत्री ने ऐसा क्या कह दिया?

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1. महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण महोत्सव के लिये क्या कार्यक्रम सरकार ने आयोजित किये?
2. अल्पसंख्यक जैन समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक हैरिटेज को संरक्षित करने के लिये क्या सरकारी योजनायें हैं?
3. जैन संस्कृति संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बोर्ड बनाने का क्या कोई प्रस्ताव है, अगर नहीं तो क्या कारण है?
4. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद के लिये सभी अल्पसंख्यक समाजों के चुने सदस्यों में रोटेशन आधार किया जाएगा, अगर नहीं तो कारण
12 फरवरी 2025/ माघ शुक्ल पूर्णिमा /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी / शरद जैन /

हां, यही चार सवाल लोकसभा में सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सांस्कृतिक मंत्रालय से जैन संस्कृति सुरक्षा के संबंध में पूछे थे। क्रम संख्या 977 के इन सवालों के 10 फरवरी 2025 को केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जो लिखित जवाब दिये, वो जैन समाज को जानने चाहिये कि सरकार जैनों के प्रति कितनी गंभीर है।

पहला, महावीर स्वामी निर्वाण महोत्सव के सरकारी कार्यक्रमों के बारे में बताया कि 13 नवम्बर 2023 से 13 नवम्बर 2024 तक संस्कृति मंत्रालय ने कार्यक्रम किये। शुरूआत का उद्घाटन भारत मण्डपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 21 अप्रैल 2024 को महावीर जयंती पर किया। हां, क्या कार्यक्रम किये, जैनों को यह जानना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने महावीर स्वामी मूर्ति पर चावल-फूल चढ़ाये, स्कूली बच्चों ने ‘वर्तमान में वर्धमान’ नृत्य नाटिका की। टिकट और सिक्का जारी किया गया। बस पूरे वर्ष यही आयोजन जारी रखेंगे।

(अब जैन समाज ही चिंतन करे महावीर स्वामी जी का 2550वां महोत्सव, पर कितने सरकारी आयोजन, अंगुली पर गिनिये, एक, दो बस।)

दूसरा सवाल – क्या कर रही सरकार जैन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिये, इसका जवाब ही नहीं दिया गया।

तीसरा सवाल – जैन संस्कृति के संरक्षण के लिये राष्ट्रीय बोर्ड बनाने की सरकारी योजना पर मंत्री जी ने दो टूक जवाब दिया कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

चौथा सवाल – रोटेशन पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष का चयन करने की सरकारी योजना, के जवाब भी नहीं है सरकार के पास, यानि कोई योजना नहीं है।

इन चारों सवालों के जवाबों से जैन समाज को समझ लेना चाहिये, जैनों के प्रति सरकारी नीतियां और आगामी योजनायें।

जैनों का सबसे बड़ा महामहोत्सव और प्रधानमंत्री द्वारा डाक टिकट और सिक्का जारी करना, मूर्ति के आगे फूल, चावल चढ़ाना और नृत्य नाटिका देखना, बस हो गई इतिश्री। चिंतन कीजिए – मनन कीजिए।
जैन संस्कृति-धर्म को बचाने के लिये सरकार के पास कोई योजना नहीं है। न तो जैनों के लिये बोर्ड बनाने का प्रस्ताव है और साथ ही अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पर जैन सदस्य का नम्बर भी आये, अभी तो सरकार सोच ही नहीं रही।
बहुत बड़े सवाल हैं, पूरे जैन समाज के लिये, जैन प्रशासनिक अधिकारी, उद्योगपति और जैन धर्म रक्षक सभी सोचें सरकार के प्रति हमारा झुकाव हमें भी बदले में कुछ देगा? या…
(पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3154 में देख सकते हैं)।