प.पू. तपस्वीसम्राट् आचार्यश्री सन्मतिसागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनिकुंजर आचार्यश्री आदिसागर (अंकलीकर) के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्यश्री सुनीलसागर जी की प्रेरणा से स्थापित आचार्य आदिसागर (अंकलीकर) अंतर्राष्ट्रीय जागृति मंच मंुबई द्वारा जिनवाणी के प्रचार-प्रसार में अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों एवं आचार्यश्री आदिसागर अंकलीकर परम्परा के उन्नयन में योगदान करने वाले विद्वानों, पत्रकारों, जैन विद्या के अनुसंधान कर्ताओं और समाज सेवा में तथा व्रती सेवा में उत्कृष्ट कार्य हेतु सन्मति महोत्सव वर्ष 2011-12 से प्रतिवर्ष पांच पुरस्कारों की स्थापना की है।
इनके अन्तर्गत इस वर्ष प्रत्येक पुरस्कृत विशिष्ट व्यक्तित्व को 51 हजार रु. की नगद राशि, शाल-श्रीफल, प्रतीक चिह्न व प्रशस्तिपत्र प्रदान किया जायगा। वर्ष 2018 के पांचों पुरस्कारों हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित हैं। प्रविष्टि विहित-पत्र (प्रोफार्मा) में स्वयं या किसी प्रस्तावक के द्वारा डाक, ई-मेल से संयोजक- डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, ‘अनुप्रेक्षा’ 22/2, रामगंज, जिन्सी, इन्दौर-452 006 (म.प्र.), e-mail : mkjainmanuj@yahoo.com मो 09826091247 के पता पर 14 अक्ट्बर 2021 तक प्राप्त हो जाना चाहिए। प्रविष्टि विहित-पत्र (प्रोफार्मा) व विवरण संयोजक से ई-मेल या वाट्सएप से प्राप्त किया जा सकता है।
पुरस्कार-
1. आचार्य आदिसागर (अंकलीकर) विद्वत् पुरस्कार: रु. 51,000/00
यह पुरस्कार जैन आगम साहित्य के पारंपरिक अध्येता/प्रवचन निष्णात/पुराविज्ञ/इतिहासज्ञ या भाषाशास्त्री तथा मुनिकुंजर आचार्य श्री आदिसागर अंकलीकर और उनकी परम्परा के उन्नयन में किसी भी प्रकार के योगदान करने वाले विशिष्ट विद्वान् को प्रदान किया जाता है।
2. आचार्य महावीरकीर्ति समाज सेवा राजनयिक पुरस्कार: रु. 51,000/00
यह पुरस्कार राजनैतिक/देश सेवा/समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु किसी राजनयिक को प्रदान किया जाता है।
पुण्यार्जक- उपरोक्त पुरस्कार के पुण्यार्जक श्री सुमेरमल अजयकुमार अरविन्द कुमार चूड़ीवाल, कोलकाता हैं।
3. आचार्य विमलसागर शोधानुसंधान पुरस्कार: रु. 51,000/00
यह पुरस्कार जैन विद्या की किसी भी विधा पर किये गये उच्चस्तरीय शोध अनुसंधान पर प्रदान किया जायगा। यह पुरस्कार किसी भी भरतीय भाषा में लिखे गये अप्रकाशित शोधप्रबंध को चयनित किये जाने पर प्रदान किया जाता है।
पुण्यार्जक- इस पुरस्कार के पुण्यार्जक श्रीमती सज्जनदेवी ज्ञानचंद मिण्डा, मुंबई हैं।
4. तपस्वीसम्राट् आचार्य सन्मतिसागर पत्रकारिता पुरस्कार: रु. 51,000/00
यह पुरस्कार जैन पत्रकारिता, संवाद संप्रेषण,जैन धर्म के प्रचार-प्रसार, अंकलीकर परम्परा के उन्नयन में विशिष्ट योगदान देने वाले पत्रकार को प्रदान किया जाता है।
पुण्यार्जक- इस पुरस्कार के पुण्यार्जक श्री कमलकुमार शान्तिलाल कासलीवाल, मुंबई हैं।
5. प्रथमगणिनी आर्यिका श्री विजयमती त्यागी सेवा पुरस्कार: रु. 51,000/00
यह पुरस्कार श्रमण-संघ, मुनि-त्यागी व्रती की उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
पुण्यार्जक- इस पुरस्कार के पुण्यार्जक श्री अजितकुमार रिखबचंद कासलीवाल, सेलम हैं।
ये पुरस्कार आचार्यश्री सन्मतिसागरजी महाराज के पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में भव्य समारोह में प्रदान किये जायेंगे। कुछ निर्देश व विवरण-
1. शोधानुसंधान (3) पुरस्कार की प्रविष्टि हेतु शोधप्रबंध की एक प्रति पूरित प्रविष्टि-पत्र के साथ प्राप्त होना चाहिए। प्रविष्टि में प्राप्त जिनका शोधप्रबंध चयनित नहीं हुआ है और वे अगले वर्षों प्रविष्टि भेजते हैं तो उन्हें दोवारा शोधप्रबंध भेजना आवश्यक नहीं होगा, केवल भेजने का संदर्भ लिखना होगा। जिन्होंने विगत वर्षों अपना शोधप्रबंध भेजा है वे केवल उसका संदर्भ लिखें।
2. निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा।
3. पुरस्कार विषयक किसी भी निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
4. चयनित महानुभाव यदि बिना किसी विशेष कारण से पुरस्कार समर्पण समारोह में उपस्थित नहीं होते हैं तो तत्काल उनका पुरस्कार निरस्त कर द्वितीय नंबर पर नामित योग्य व्यक्ति को प्रदान किया जा सकेगा।
5. आचार्य श्री आदिसागर अंकलीकर परम्परा के उन्नयन में विशिष्ट योगदान से संबंधित संलग्नक फार्म के साथ अलग से भेजें। जिन्होंने सन 2020 के लिए प्रविष्टि भेजी थी, वे केवल प्रोफार्मा भर कर भेज सकते हैं, उन्हें संलग्नक भेजने की आवश्यकता नहीं है।
6. किसी अन्य द्वारा प्रस्ताव भेजने की दशा में नामित व्यक्तित्व की सहमति आवश्यक है।
संयोजक
डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’,
‘अनुप्रेक्षा’ 22/2, रामगंज, जिन्सी, इन्दौर-452 006 (म.प्र.),
e-mail : mkjainmanuj@yahoo.com मो 09826091247